पाठ का परिचय
विष्णु के नारायण, पद्मनाभ, माधव और श्रीधर जैसे नामों के साथ उनके पारंपरिक प्रतीकों को समझें।
यह नाम-मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. विष्णवे
ॐ विष्णवे नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ viṣṇave namaḥ .
सरल भावार्थ: यह सर्वव्यापक विष्णु को प्रणाम है।
2. लक्ष्मीपतये
ॐ लक्ष्मीपतये नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ lakṣmīpataye namaḥ .
सरल भावार्थ: यह लक्ष्मी के पति विष्णु को प्रणाम है।
3. जगन्नाथाय
ॐ जगन्नाथाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ jagannāthāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह जगत के नाथ विष्णु को प्रणाम है।
4. वासुदेवाय
ॐ वासुदेवाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ vāsudevāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह वासुदेव नाम से पूजित विष्णु को प्रणाम है।
5. त्रिविक्रमाय
ॐ त्रिविक्रमाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ trivikramāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह तीन पगों के रूपक से जुड़े त्रिविक्रम को प्रणाम है।
6. नारायणाय
ॐ नारायणाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ nārāyaṇāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह नारायण रूप विष्णु को प्रणाम है।
7. पद्मनाभाय
ॐ पद्मनाभाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ padmanābhāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह नाभि से कमल के प्रतीक वाले विष्णु को प्रणाम है।
8. हृषीकेशाय
ॐ हृषीकेशाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ hṛṣīkeśāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह इंद्रियों के स्वामी हृषीकेश को प्रणाम है।
9. माधवाय
ॐ माधवाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ mādhavāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह माधव नाम से पूजित विष्णु को प्रणाम है।
10. चक्रपाणये
ॐ चक्रपाणये नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ cakrapāṇaye namaḥ .
सरल भावार्थ: यह सुदर्शन चक्र धारण करने वाले विष्णु को प्रणाम है।
11. गदाधराय
ॐ गदाधराय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ gadādharāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह गदा धारण करने वाले विष्णु को प्रणाम है।
12. श्रीधराय
ॐ श्रीधराय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śrīdharāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह श्री अर्थात लक्ष्मी को धारण करने वाले विष्णु को प्रणाम है।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।