पाठ का परिचय
शिव, शंभु, शंकर, गंगाधर और कैलासवासी जैसे नामों के माध्यम से शिव के ध्यान, करुणा और पारंपरिक रूपों का परिचय।
यह नाम-मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. शिवाय
ॐ शिवाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śivāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह कल्याणस्वरूप शिव को प्रणाम है।
2. महेश्वराय
ॐ महेश्वराय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ maheśvarāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह महान ईश्वर रूप शिव को प्रणाम है।
3. शम्भवे
ॐ शम्भवे नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śambhave namaḥ .
सरल भावार्थ: यह शंभु नाम से पूजित शिव को प्रणाम है।
4. पिनाकिने
ॐ पिनाकिने नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ pinākine namaḥ .
सरल भावार्थ: यह पिनाक धनुष धारण करने वाले शिव को प्रणाम है।
5. शशिशेखराय
ॐ शशिशेखराय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śaśiśekharāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह मस्तक पर चंद्र धारण करने वाले शिव को प्रणाम है।
6. वामदेवाय
ॐ वामदेवाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ vāmadevāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह वामदेव रूप शिव को प्रणाम है।
7. विरूपाक्षाय
ॐ विरूपाक्षाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ virūpākṣāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह विशिष्ट नेत्रों वाले शिव को प्रणाम है।
8. कपर्दिने
ॐ कपर्दिने नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ kapardine namaḥ .
सरल भावार्थ: यह जटाजूट वाले शिव को प्रणाम है।
9. शङ्कराय
ॐ शङ्कराय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śaṅkarāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह कल्याण करने वाले शंकर को प्रणाम है।
10. शूलपाणये
ॐ शूलपाणये नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śūlapāṇaye namaḥ .
सरल भावार्थ: यह हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले शिव को प्रणाम है।
11. अम्बिकानाथाय
ॐ अम्बिकानाथाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ ambikānāthāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह अंबिका के नाथ शिव को प्रणाम है।
12. भक्तवत्सलाय
ॐ भक्तवत्सलाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ bhaktavatsalāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह भक्तों के प्रति स्नेह रखने वाले शिव को प्रणाम है।
13. गङ्गाधराय
ॐ गङ्गाधराय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ gaṅgādharāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह गंगा धारण करने वाले शिव को प्रणाम है।
14. जटाधराय
ॐ जटाधराय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ jaṭādharāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह जटाएँ धारण करने वाले शिव को प्रणाम है।
15. कैलासवासिने
ॐ कैलासवासिने नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ kailāsavāsine namaḥ .
सरल भावार्थ: यह कैलास में वास करने वाले शिव को प्रणाम है।
16. सदाशिवाय
ॐ सदाशिवाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ sadāśivāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह सदा कल्याणस्वरूप सदाशिव को प्रणाम है।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।