पाठ का परिचय
असतो मा, सह नाववतु, पूर्णमदः और सर्वे भवन्तु सुखिनः के छोटे पाठ तथा सरल भाव। ये सार्वभौमिक प्रार्थनाएँ किसी एक देवता की नामावली नहीं हैं।
यह प्रार्थना का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. असतो मा
असतो मा सद्गमय ।
तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥
रोमन लिपि: asato mā sadgamaya .
tamaso mā jyotirgamaya .
mṛtyormā amṛtaṃ gamaya .
सरल भावार्थ: असत से सत, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमृत की ओर ले चलने की प्रार्थना।
2. सह नाववतु
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु ।
सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
रोमन लिपि: Oṃ saha nāvavatu . saha nau bhunaktu .
saha vīryaṃ karavāvahai .
tejasvi nāvadhītamastu mā vidviṣāvahai .
Oṃ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ .
सरल भावार्थ: अध्यापक और विद्यार्थी दोनों की रक्षा और पोषण हो, दोनों मिलकर प्रयास करें, अध्ययन तेजस्वी हो और परस्पर द्वेष न हो।
3. पूर्णमदः
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
रोमन लिपि: Oṃ pūrṇamadaḥ pūrṇamidaṃ pūrṇātpūrṇamudacyate .
pūrṇasya pūrṇamādāya pūrṇamevāvaśiṣyate .
Oṃ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ .
सरल भावार्थ: वह पूर्ण है, यह पूर्ण है; पूर्ण से पूर्ण प्रकट होता है। पूर्ण से पूर्ण लेने पर भी पूर्णता शेष रहती है।
4. सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥
रोमन लिपि: sarve bhavantu sukhinaḥ sarve santu nirāmayāḥ .
sarve bhadrāṇi paśyantu mā kaścidduḥkhabhāgbhavet .
सरल भावार्थ: सभी सुखी और स्वस्थ रहें, सभी मंगल देखें और किसी को दुःख न मिले—यह सबके लिए शुभकामना है।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।