पाठ का परिचय
सरस्वती के वाणी, पुस्तक, विद्या और ज्ञान से जुड़े आठ नामों का पाठ। पढ़ाई या संगीत-अभ्यास से पहले अर्थ समझकर प्रार्थना कर सकते हैं।
यह नाम-मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. सरस्वत्यै
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ sarasvatyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह सरस्वती देवी को प्रणाम है।
2. महाभद्रायै
ॐ महाभद्रायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ mahābhadrāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह महान मंगलस्वरूप देवी को प्रणाम है।
3. पुस्तकभृते
ॐ पुस्तकभृते नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ pustakabhṛte namaḥ .
सरल भावार्थ: यह पुस्तक धारण करने वाली देवी को प्रणाम है।
4. ज्ञानमुद्रायै
ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ jñānamudrāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह ज्ञानमुद्रा धारण करने वाली देवी को प्रणाम है।
5. महाविद्यायै
ॐ महाविद्यायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ mahāvidyāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह महान विद्या स्वरूप देवी को प्रणाम है।
6. वाग्देव्यै
ॐ वाग्देव्यै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ vāgdevyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह वाणी की देवी को प्रणाम है।
7. भारत्यै
ॐ भारत्यै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ bhāratyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह भारती नाम से पूजित देवी को प्रणाम है।
8. विद्यारूपायै
ॐ विद्यारूपायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ vidyārūpāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह विद्या स्वरूप देवी को प्रणाम है।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।