पाठ का परिचय
श्रीराम, रामचंद्र, राघव और जानकीवल्लभ के नामों का सरल पाठ। रामभक्ति में मर्यादा और आत्मीयता के भाव को समझें।
यह नाम-मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. श्रीरामाय
ॐ श्रीरामाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śrīrāmāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह श्रीराम को प्रणाम है।
2. रामचन्द्राय
ॐ रामचन्द्राय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ rāmacandrāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह रामचंद्र को प्रणाम है।
3. राघवाय
ॐ राघवाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ rāghavāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह रघुवंश में जन्मे राम को प्रणाम है।
4. जानकीवल्लभाय
ॐ जानकीवल्लभाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ jānakīvallabhāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह जानकी अर्थात सीता के प्रिय राम को प्रणाम है।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।