पाठ का परिचय
राहु ग्रहण-संबंधी कथाओं से जुड़े ग्रह-देवता हैं। चित्र में मुकुटधारी सिर और नाग का रूप उनकी सांकेतिक पहचान दर्शाता है।
यह नाम-मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
यह सरल नाम-नमस्कार है। सूर्य के नाम-मंत्र अलग सूर्य संग्रह में हैं। ग्रह-स्मरण को जीवन की घटनाओं की निश्चित भविष्यवाणी न मानें।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. राहवे
ॐ राहवे नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ rāhave namaḥ .
सरल भावार्थ: राहु ग्रह-देवता को आदरपूर्वक प्रणाम।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।