पाठ का परिचय
त्र्यंबक के स्मरण का प्रचलित वैदिक मंत्र। उसके बंधन और मुक्ति के रूपक को अर्थ सहित समझें।
यह वैदिक मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
यह आध्यात्मिक प्रार्थना है; इससे रोग ठीक होने, आयु बढ़ने या संकट टलने का निश्चित दावा नहीं किया जाता।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
रोमन लिपि: Oṃ tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭivardhanam .
urvārukamiva bandhanānmṛtyormukṣīya māmṛtāt .
सरल भावार्थ: हम सुगंधित, पोषण बढ़ाने वाले त्र्यंबक की उपासना करते हैं। जैसे पका फल बंधन से अलग होता है, वैसे मृत्यु के बंधन से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं, अमृत से अलग होने की नहीं।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।