पाठ का परिचय
लक्ष्मी के कमल, श्रद्धा और प्रकाश से जुड़े आठ नामों का अर्थ सहित पाठ। इन्हें भक्तिपरक नाम-स्मरण के रूप में पढ़ें।
यह नाम-मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. लक्ष्म्यै
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ lakṣmyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह लक्ष्मी देवी को प्रणाम है।
2. पद्मालयायै
ॐ पद्मालयायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ padmālayāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह कमल को अपना निवास मानने वाली देवी को प्रणाम है।
3. पद्मायै
ॐ पद्मायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ padmāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह पद्म अर्थात कमल से जुड़े देवी रूप को प्रणाम है।
4. श्रद्धायै
ॐ श्रद्धायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śraddhāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह श्रद्धा स्वरूप देवी को प्रणाम है।
5. सुधायै
ॐ सुधायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ sudhāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह सुधा अर्थात अमृत से जुड़े देवी रूप को प्रणाम है।
6. हिरण्मय्यै
ॐ हिरण्मय्यै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ hiraṇmayyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह स्वर्णमय आभा वाले देवी रूप को प्रणाम है।
7. दीप्तायै
ॐ दीप्तायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ dīptāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह दीप्ति स्वरूप देवी को प्रणाम है।
8. वसुधायै
ॐ वसुधायै नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ vasudhāyai namaḥ .
सरल भावार्थ: यह वसुधा नाम से पूजित देवी को प्रणाम है।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।