पाठ का परिचय
कृष्ण के गोपाल, गोविंद, व्रजेश्वर और मोहन नामों का अर्थ सहित संग्रह। वृंदावन की भक्ति-परंपरा में इन नामों के भाव को समझें।
यह नाम-मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. श्रीकृष्णाय
ॐ श्रीकृष्णाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ śrīkṛṣṇāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह श्रीकृष्ण को प्रणाम है।
2. गोविन्दाय
ॐ गोविन्दाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ govindāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह गोविंद नाम से पूजित कृष्ण को प्रणाम है।
3. गोकुलोत्सवाय
ॐ गोकुलोत्सवाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ gokulotsavāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह गोकुल के आनंद रूप कृष्ण को प्रणाम है।
4. गोपालाय
ॐ गोपालाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ gopālāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह गोपों और गायों के पालक कृष्ण को प्रणाम है।
5. गोपगोपीशाय
ॐ गोपगोपीशाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ gopagopīśāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह गोप और गोपियों के ईश्वर कृष्ण को प्रणाम है।
6. व्रजेश्वराय
ॐ व्रजेश्वराय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ vrajeśvarāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह व्रज के ईश्वर कृष्ण को प्रणाम है।
7. मोहनाय
ॐ मोहनाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ mohanāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह मन मोहने वाले कृष्ण को प्रणाम है।
8. गोपीजनवल्लभाय
ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः ।
रोमन लिपि: Oṃ gopījanavallabhāya namaḥ .
सरल भावार्थ: यह गोपियों के प्रिय कृष्ण को प्रणाम है।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।