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गायत्री मंत्र — मूल पाठ और भावार्थ — Omaaa Astro

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मंत्र

गायत्री मंत्र — मूल पाठ और भावार्थ

सवितृ के प्रकाश और बुद्धि की प्रेरणा की प्रार्थना। गायत्री के इस प्रचलित पाठ में ॐ और व्याहृतियाँ आरंभ में दी गई हैं।

चित्र के साथ समझें

इस लेख की मुख्य बातें

गायत्री मंत्र — मूल पाठ और भावार्थ
प्रतीकात्मक चित्र

सवितृ के प्रकाश और बुद्धि की प्रेरणा की प्रार्थना। गायत्री के इस प्रचलित पाठ में ॐ और व्याहृतियाँ आरंभ में दी गई हैं।

  1. देवता / विषय

    गायत्री मंत्र

  2. पाठ की पहचान

    वैदिक मंत्र

  3. इस पेज का संग्रह

    1 पाठ, अर्थ और रोमन लिपि के साथ।

  4. अभ्यास

    धीरे पढ़ें, अर्थ समझें और सहज गति रखें।

पाठ का परिचय

सवितृ के प्रकाश और बुद्धि की प्रेरणा की प्रार्थना। गायत्री के इस प्रचलित पाठ में ॐ और व्याहृतियाँ आरंभ में दी गई हैं।

यह वैदिक मंत्र का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।

इस मंत्र की ऋचा का देवता सवितृ है। चित्र में गायत्री की देवी-स्वरूप सांकेतिक प्रस्तुति है; दोनों पहचानें पाठ-परंपरा में अलग संदर्भ रखती हैं।

मूल पाठ और सरल अर्थ

1. गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः ।
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि ।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

रोमन लिपि: Oṃ bhūrbhuvaḥ svaḥ .
tatsaviturvareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi .
dhiyo yo naḥ pracodayāt .

सरल भावार्थ: हम सवितृ देव के वरणीय तेज का ध्यान करते हैं; वह हमारी बुद्धियों को प्रेरित करे।

पढ़ने और जप का तरीका

  • पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
  • आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
  • रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
  • चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।

पाठ-संदर्भ

संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें

नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।

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