पाठ का परिचय
एकदंत और वक्रतुंड गणेश का ध्यान और प्रेरणा की प्रार्थना। गणपति अथर्वशीर्ष में मिलने वाला छोटा पाठ पढ़ें।
यह प्रार्थना का संग्रह है। नीचे मूल पाठ के साथ सरल भावार्थ दिया गया है। भावार्थ शब्दशः अनुवाद का विकल्प नहीं है; पाठ-परंपरा में भेद मिल सकते हैं।
मूल पाठ और सरल अर्थ
1. गणेश गायत्री
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
रोमन लिपि: Oṃ ekadantāya vidmahe vakratuṇḍāya dhīmahi .
tanno dantiḥ pracodayāt .
सरल भावार्थ: हम एकदंत को जानने और वक्रतुंड का ध्यान करने का भाव रखते हैं; दंति गणेश हमें प्रेरित करें।
पढ़ने और जप का तरीका
- पहले पूरा पाठ धीरे पढ़ें और उसके अर्थ को समझें। एक नाम या एक प्रार्थना से शुरुआत कर सकते हैं।
- आराम से बैठें और सहज गति रखें। गिनती से अधिक स्पष्ट, ध्यानपूर्वक पढ़ने पर ध्यान दें। किसी संख्या को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- रोमन लिपि पढ़ने में सहायता है; वह वैदिक स्वर या गुरु से सीखे उच्चारण का विकल्प नहीं है। औपचारिक अनुष्ठान में अपनी परंपरा का मार्गदर्शन लें।
- चित्र संबंधित देवता की सांकेतिक कलात्मक प्रस्तुति है। पाठ पढ़ते समय नाम और चित्र का संबंध समझें।
पाठ-संदर्भ
संस्कृत मूल पाठ का संदर्भ देखें
नामावली से चुने नाम और छोटे पारंपरिक पाठ दिए गए हैं। ऊपर का भावार्थ और पढ़ने की सहायता इस संग्रह के लिए लिखे गए हैं।