अनुमानित कुंडली: JPL के कक्षीय मॉडल, संक्षिप्त सूर्य/चंद्र गणना, रैखिक लाहिड़ी अयनांश, औसत राहु/केतु और पूर्ण-राशि भाव। यह सटीक पंचांग या प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं है। सीमा के पास राशि, भाव, नवांश और पारंपरिक संकेत बदल सकते हैं। समर्थित UTC वर्ष: 1900–2050।
ये सीमित पारंपरिक नियम हैं, निदान या अंतिम निर्णय नहीं। मंगल को लग्न, चंद्र और शुक्र से 1/2/4/7/8/12 भाव में जाँचा जाता है। कालसर्प में औसत राहु/केतु हैं; भंग और उपप्रकार शामिल नहीं। साढ़ेसाती केवल चुने समय की जाँच है।